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स्वाद वाली चीजों से सड़कों पर दौड़नेवाला वाहन तैयार किया जाए, यह सुनने में विचित्र लगता है। शायद इसीलिए आलू-गाजर से रेस कार बनाए जाने की खब...
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संगीत हमारी कृषि संस्कृति का जरूरी हिस्सा है। हमारे गांवों में कोई भी मांगलिक या कृषि संबंधी कार्य गीत-संगीत के बिना संपन्न नहीं होता। घ...
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भाषा का न सांप्रदायिक आधार होता है, न ही वह शास्त्रीयता के बंधन को मानती है। अपने इस सहज रूप में उसकी संप्रेषणयीता और सौन्दर्य को देखना हो...
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ताकत, शोहरत और बाजार में सस्ते उत्पादों के दम पर चीन की चौधराहट का डंका भले ही दुनिया भर में रहा हो, लेकिन एक मामले में भारत क्या वह उत्तर प...
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दुनिया में पानी के बाद यदि कोई चीज सबसे अधिक पी जानेवाली है तो वह संभवत: चाय ही है। सुबह-सुबह चाय न मिले तो दिन का जायका ही नहीं बनता। आप र...
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11 अप्रैल को हिन्दी के प्रख्यात कथाशिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु की पुण्यतिथि थी। उस दिन चाहता था कि उनकी स्मृति से जुड़ी कुछ बातें खेती-...
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भारतीय कृषि के बारे में कहा जाता है कि वह मानसून के साथ जुआ है। यह दुर्भाग्य है कि आजादी के छह दशकों बाद भी इसकी इस दु:स्थिति में कोई सुधा...
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हमारे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो जलवायु परिवर्तन को पश्चिमी दुनिया द्वारा खड़ा किया गया हौवा मानते हैं। लेकिन मैं इसे अपने घर की चौखट...
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सुअर जैसा बदनसीब प्राणी शायद ही किसी को माना जाता हो, लेकिन उस सुअर को क्या कहें जो अपने देश में अकेला है और अब उसे अन्य जानवरों से भी अलग...

अशोक जी बहुत ही बढ़िया ब्लॉग हे आपका ।
ReplyDeleteकभी हमारे ब्लॉग www.mykisandost.com जो की किसानो और क्रषि पर आधरित है। क्रप्या उस पर भी अवश्य पधारे और हमें मार्गदर्शन दे।