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Monday, July 28, 2014
Sunday, May 10, 2009
मोतिहारी में जन्मे जॉर्ज ऑरवेल का ऐनिमल फार्म तो पढ़ा ही होगा !
सुअरों की बात चले और ऐनिमल फार्म याद न आए, ऐसा हो नहीं सकता। बीसवीं सदी के महान अंग्रेज उपन्यासकार जॉर्ज ऑरवेल ने अपनी इस कालजयी कृति में सुअरों को केन्द्रीय चरित्र बनाकर बोलशेविक क्रांति की विफलता पर करारा व्यंग्य किया था। अपने आकार के लिहाज से लघु उपन्यास की श्रेणी में आनेवाली यह रचना पाठकों के लिए आज भी उतनी ही असरदार है। कालजयी कृति का संदर्भ कभी मरता नहीं। हर युग और देश के संदर्भ में वह इस कदर महत्वपूर्ण दिखने लगती है कि लगता है कि उसकी रचना उसी संदर्भ में हुई हो। ऐनिमल फार्म भी उसी तरह की अमर कृति है, जो आज के संदर्भ में भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। खासकर मौजूदा समय में भारत की राजनीतिक व्यवस्था के संदर्भ में यह उपन्यास और अधिक अर्थबहुल हो जाता है। यही कारण है कि वर्तमान भारत की राजनीतिक स्थितियों का चित्रण करने के लिए राजनीतिक टिप्पणीकार अक्सर इसके उद्धरण प्रस्तुत करते हैं।
जॉर्ज ऑरवेल (1903-1950) के संबंध में खास बात यह है कि उनका जन्म भारत में ही बिहार के मोतिहारी नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता ब्रिटिश राज की भारतीय सिविल सेवा के मुलाजिम थे। ऑरवेल का मूल नाम एरिक आर्थर ब्लेयर था। उनके जन्म के साल भर बाद ही उनकी मां उन्हें लेकर इंग्लैण्ड में बस गयी, जहां सेवानिवृत्ति के बाद उनके पिता भी चले गए। वहीं पर उनकी शिक्षा हुई।
ऐनिमल फार्म की कहानी कुछ इस प्रकार है : मेनर फार्म के जानवर अपने मालिक के खिलाफ बगावत कर देते हैं और शासन अपने हाथ में ले लेते हैं। जानवरों में सुअर सबसे चालाक हैं और इसलिए वे ही इनका नेतृत्व करते हैं। सुअर जानवरों की सभा में सुशासन के कुछ नियम तय करते हैं। पंरतु बाद में ये सुअर आदमी का ही रंग-ढंग अपना लेते हैं और अपने फायदे व ऐश के लिए दूसरे जानवरों का शोषण करने लगते हैं। इस क्रम में वे नियमों में मनमाने ढंग से तोड़-मरोड़ भी करते हैं। मसलन नियम था – ALL ANIMALS ARE EQUAL. लेकिन उसमें हेराफेरी कर उसे बना दिया जाता है:-
ALL ANIMALS ARE EQUAL,
BUT SOME ANIMALS ARE MORE EQUAL THAN OTHERS.
जॉर्ज ऑरवेल के इस मशहूर उपन्यास को हममें से अधिकांश ने जरूर पढ़ा होगा। लेकिन यह एक ऐसी रचना है, जिसकी पंक्तियों के बीच बार-बार तांक-झांक करने को मन करता है। ऐनिमल फार्म ऑनलाइन उपलब्ध है और इसे इस लिंक पर जाकर पढ़ा जा सकता है।
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