भारतीय कृषि के बारे में कहा जाता है कि वह मानसून के साथ जुआ है। यह दुर्भाग्य है कि आजादी के छह दशकों बाद भी इसकी इस दु:स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। सच तो यह है कि आजाद भारत के भाग्य विधाताओं ने भारतीय किसानों को मानसून के साथ जुआ खेलने की स्थिति में भी नहीं छोड़ा। पहले हमारे गांवों में ताल, पोखर, आहर जैसे वर्षा जल संचयन साधनों की भरमार थी, जिनकी बदौलत हमारी खेती मानसून की बेरूखी से टक्कर ले सकती थी। आज वे सभी समाप्तप्राय हैं। पर्यावरण के शत्रु बन चुके अतिक्रमणकारियों ने पुआल और मिट्टी से पाटकर उन्हें खेत बना डाला अथवा उनकी जमीन पर मकान बना डाले। हमारी सरकार वर्षा जल संचयन के उन प्राकृतिक स्रोतों की हिफाजत में पूरी तरह विफल रही। बिहार के जिस कैमूर जिले में मैं रहता हूं, वह भीषण सूखे की चपेट में है। जीवन को प्रवाहमान रखने के लिए हम किसानों के सामने मानसून के साथ जुआ खेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। लेकिन यह जुआ खेलते भी तो किस बूते। हमारे गांव के आहर-तालाब अतिक्रमणकारियों के लालच और सरकार की बेरूखी की भेंट चढ़ चुके हैं। नहर में पानी का टोटा पड़ा हुआ है। बिजली सिर्फ दर्शन भर के लिए आती है। डीजल पर अनुदान जैसी राहत की सरकारी घोषणाएं सिर्फ कागजों पर हैं। इस मुश्किल समय में यदि हमारे इलाके के किसान मानसून के साथ जुआ खेलने में समर्थ हो पाए हैं तो चाइनीज डीजल इंजन पंपिंग सेटों के बूते। सरकार जिन स्वदेशी डीजल इंजन पंपिंग सेटों की खरीद पर अनुदान देती है, वे भारी और महंगे होते हैं और एक घंटे में एक लीटर डीजल खा जाते हैं। जबकि चाइनीज डीजल इंजन पंपिंग सेट अपेक्षाकृत सस्ते हैं और हल्के भी। इतने हल्के कि दो आदमी आसानी से इन्हें कहीं भी लेकर जा सकते हैं। सबसे बड़ी बात है कि ये आधे लीटर डीजल में ही एक घंटे चल जाते हैं। बगल के चित्र में जिस डीजल इंजन पंपिंग सेट के जरिए किसान सूखे खेतों तक पानी पहुंचाने का उद्यम कर रहे हैं, वह चाइनीज ही है।
इंटरनेट पर मैं खबर पढ़ रहा हूं कि चीन की दवा कंपनियों ने ''मेड इन इंडिया'' के लेबल के साथ नकली दवाइयां बनाकर उन्हें अफ़्रीकी देश नाइजीरिया भेजा। दो महीने पहले नाइजीरिया में ऐसी नकली दवाओं की एक बड़ी खेप पकड़ी गयी थी। कहा जा रहा है कि खुद चीनी अधिकारियों ने भी मान लिया है (कि चीनी कंपिनयां इस कांड में शामिल थीं)। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि चीन की निंदा करूं या उसे धन्यवाद दूं। आखिर यह भी तो सच है कि हमारे इलाके के असंख्य किसान चीन निर्मित डीजल इंजन पंपिंग सेटों की ताकत पर ही तो मानसून के साथ जुआ खेलने में समर्थ हो पाए हैं।