विख्यात इतिहासकार सुमित सरकार की पुस्तक 'आधुनिक भारत' का एक अंश
पंद्रह अगस्त
अंतत: भारतीय प्रायद्वीप को स्वतंत्रता मिल ही गयी और स्वतंत्रता-सेनानियों के सुनहरे सपनों की तुलना में अनेक लोगों को यह तुच्छ ही प्रतीत हुई होगी। कारण कि अनेक वर्षों तक भारत में मुसलमानों और पाकिस्तान में हिन्दुओं के लिए स्वतंत्रता का अर्थ रहा – अचानक भड़क उठनेवाली हिंसा और रोजगार तथा आर्थिक अवसरों की तंगी के बीच या अपनी पीढि़यों पुरानी जड़ों से उखड़कर शरणार्थियों के रेले में सम्मिलित हो जाने के बीच चयन करना। यह बहुआयामी मानव-त्रासदी बलराज साहनी की अंतिम फिल्म 'गरम हवा' में बड़े ही हृदयस्पर्शी ढंग से चित्रित हुई है।
एक अन्य स्तर पर जो पूर्णत: असंबद्ध नहीं है, वे आर्थिक एवं सामाजिक विषमताएं अभी भी बनी रहीं, जिन्होंने साम्राज्यवाद-विरोधी जन-आंदोलन को ठोस आधार प्रदान किया था क्योंकि शहरों और गांवों में विशेषाधिकार-संपन्न समूह राजनीतिक स्वंत्रता की प्राप्ति का संबंध उग्र सामाजिक परिवर्तनों से तोड़ने में सफल रहे थे। अंग्रेज तो चले गए थे किन्तु पीछे छोड़ गए थे अपनी नौकरशाही और पुलिस जिनमें स्वतंत्रता के बाद भी विशेष अंतर नहीं आया था और जो उतने ही (कभी-कभी तो और भी अधिक) दमनकारी हो सकते थे।
अपने जीवन के अंतिम महीनों में महात्मा गांधी के अकेलेपन और व्यथा के कारण केवल सांप्रदायिक दंगे ही नहीं थे। अपनी हत्या से कुछ ही पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि देश को अपने ''सात लाख गांवों के लिए सामाजिक, नैतिक और आर्थिक आजादी पानी अभी बाकी है'', ''कि कांग्रेस ने 'राटन बरो' बना लिए हैं जो भ्रष्टाचार की ओर जाते हैं, ये वे संस्थाएं हैं जो नाममात्र के लिए ही लोकप्रिय और जनतांत्रिक हैं।'' इस कारण उन्होंने सलाह दी थी कि राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस को भंग कर दिया जाना चाहिए और उसके स्थान पर एक लोकसेवक संघ की स्थापना की जानी चाहिए जिसमें सच्चे अर्थों में समर्पित, आत्मबलिदानी, रचनात्मक ग्राम-कार्य करनेवाले लोग हों।
फिर भी करोड़ों लोग जो समस्त भारतीय प्रायद्वीप में खुशियां मना रहे थे, अर्धरात्रि को भारत की 'नियति के साथ भेंट' पर नेहरू का भाषण सुनकर रोमांचित हो रहे थे और जिन्होंने उस समय बालक रहे व्यक्ति के लिए भी 15 अगस्त को एक अविस्मरणीय अनुभव बना दिया था, वे पूर्णरूपेण भ्रांति के शिकार नहीं थे। 1948-51 में कम्युनिस्टों ने अपनी कीमत पर ही जाना कि 'ये आजादी झूठी है' के नारे में दम नहीं था। भारत की स्वाधीनता उपनिवेशवाद के विघटन की एक ऐसी प्रक्रिया का आरंभ थी जिसे, कम से कम जहां तक राजनीतिक स्वाधीनता का प्रश्न है, रोकना कठिन सिद्ध हुआ।
('आधुनिक भारत' के पहले छात्र संस्करण 1992 के पृष्ठ 504-505 से साभार)
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
-
आज हम आपसे हिन्दी के विषय में बातचीत करना चाहते हैं। हो सकता है, हमारे कुछ मित्रों को लगे कि किसान को खेती-बाड़ी की चिंता करनी चाहिए। वह हि...
-
आज के समय में टीवी व रेडियो पर मौसम संबंधी जानकारी मिल जाती है। लेकिन सदियों पहले न टीवी-रेडियो थे, न सरकारी मौसम विभाग। ऐसे समय में महान कि...
-
भारत सरकार की नीतियों ने हमारे बासमती चावल (Basmati Rice) का यह हाल कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसके खरीदार नहीं मिल रहे हैं। अप...
-
कृषि का भारत के लिए जितना महत्व है, इससे संबंधित शिक्षा और शोध पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। लेकिन मर कर जंगलों को फायदा पहुंचानेवाले सिका...
-
भाषा का न सांप्रदायिक आधार होता है, न ही वह शास्त्रीयता के बंधन को मानती है। अपने इस सहज रूप में उसकी संप्रेषणयीता और सौन्दर्य को देखना हो...
-
शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन से खुलासा हुआ है कि विंध्य घाटी में मिले जीवाश्म दुनिया में प्राचीनतम हैं। ये धरती के अन्य किसी हिस्से में प...
-
दाने दाने पर लिखा है, खानेवाले का नाम। यह कहावत आपने जरूर सुनी होगी। लेकिन अब हमें उस समय के लिए तैयार रहना चाहिए, जब कहना पड़े, 'दाने ...
-
ब्रोकोली हृदय के लिए फायदेमंद है, यह बात बहुत पहले से कही जाती रही है। लेकिन अब ब्रिटिश वैज्ञानिक यह भी बता रहे हैं कि ब्रोकोली किस तरह फायद...
-
उत्तरप्रदेश के एक गांव में आलू चुनते ग्रामीण (फोटो रायटर से साभार) भा रतीय वैज्ञानिकों ने आलू की ऐसी जीन संवर्धित प्रजाति को विकसित कर...
-
यदि आपकी पर्यटन व तीर्थाटन में रुचि है तो आपको कैमूर पहाड़ पर मौजूद मुंडेश्वरी धाम की यात्रा एक बार अवश्य करनी चाहिए। पहाड़ की चढ़ाई, जंगल...
बहुत आभार. स्वतंत्रता दिवस की आपको बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.
ReplyDeleteआप को आज़ादी की शुभकामनाएं .....
ReplyDeleteआपको भी बहुत बहुत शुभकामनाएं।
ReplyDeleteस्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाऐं ओर बहुत बधाई आप सब को
ReplyDeleteअशोक भाई,
ReplyDeleteवँदे मातरम्`
अच्छा आलेख देने के लिये आभार !
- लावण्या
शुभकामनाएं पूरे देश और दुनिया को
ReplyDeleteउनको भी इनको भी आपको भी दोस्तों
स्वतन्त्रता दिवस मुबारक हो
achha prayas raha aapka
स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएं!
ReplyDeleteस्वतंत्रता दिवस के इस पवन पर्व पर सभी ब्लॉगर मित्रो को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.
ReplyDeleteअच्छी पोस्ट और उसमें अच्छे लिंक! आप वास्तव में मेहनत से पोस्ट रचना करते हैं।
ReplyDeleteधन्यवाद।
बहुर सार्थक प्रस्तुति,
ReplyDeleteइसे धारावाहिक देना चाहिए.
============================
आपको स्वतंत्रता दिवस की बधाई
डॉ.चन्द्रकुमार जैन
सुमित सरकार की पुस्तक का अंश प्रकाशित कर आपने बहुत से पाठकों को एक अच्छी पुस्तक पढ़ने की प्रेरणा दी है। साधुवाद।
ReplyDeleteआपको धन्यवाद यह पुस्तक अंश प्रकाशित करने का।
ReplyDeleteऔर स्वतंत्रता दिवस तथा राखी की शुभ कामनाएं .
दन्यवाद इस पोस्ट के लिए !
ReplyDeleteTum saa koi nahi
ReplyDelete