
झारखंड प्रदेश से भोजपुरी की नयी त्रैमासिक पत्रिका परास का प्रकाशन आरंभ हुआ है। तेनुघाट साहित्य परिषद (बोकारो) द्वारा निकाली जा रही इस पत्रिका के संपादक आसिफ रोहतासवी के हिन्दी और भोजपुरी के कई कविता व गजल संग्रह आ चुके हैं। पटना विश्वविद्यालय के सायंस कॉलेज में हिन्दी के व्याख्याता डॉ. रोहतासवी की रचनाओं में कृषि संस्कृति और ग्राम जीवन की अमिट छाप देखने को मिलती है। आशा है उनके कुशल संपादन में यह पत्रिका भी गांव की मिट्टी से जुड़ी इन संवेदनाओं की वाहक बनेगी।
परास के समहुत-अंक से उद्धृत है लोकप्रिय कवि व गीतकार स्व. कैलाश गौतम का एक भोजपुरी गीत :
चला चलीं कहीं बनवा के पार हिरना
एही बनवा में बरसै अंगार हिरना।
रेत भइलीं नदिया, पठार भइलीं धरती
जरि गइलीं बगिया, उपर भइलीं परती
एही अगिया में दहकै कछार हिरना।
निंदिया क महंगी सपनवा क चोरी
एही पार धनिया, त ओहि पार होरी
बिचवां में उठलीं दीवार हिरना।
बड़ी-बड़ी बखरी क बड़ी-बड़ी कहनी
केहू धोवै सोरिया, त केहू तौरै टहनी
केहू बीछै हरी-हरी डार हिरना।
गीतिया ना महकी, ना फुलिहैं कजरवा
लुटि जइहैं लजिया, न अंटिहैं अंचरवा
बिकि जइहैं सोरहो सिंगार हिरना।