Sunday, November 30, 2008

अमृता प्रीतम की कविता : राजनीति


सुना है राजनीति एक क्‍लासिक फिल्‍म है
हीरो : बहुमुखी प्रतिभा का मालिक
रोज अपना नाम बदलता
हीरोइन : हकूमत की कुर्सी वही रहती है
ऐक्‍स्‍ट्रा : राजसभा और लोकसभा के मैम्‍बर
फाइनेंसर : दिहाड़ी के मजदूर,
कामगर और खेतिहर
(फाइनेंस करते नहीं, करवाए जाते हैं)
संसद : इनडोर शूटिंग का स्‍थान
अखबार : आउटडोर शू‍टिंग के साधन
यह फिल्‍म मैंने देखी नहीं
सिर्फ सुनी है
क्‍योंकि सैन्‍सर का कहना है-
’नॉट फॉर अडल्‍स।’

(फोटो बीबीसी हिन्‍दी से साभार)