Wednesday, September 3, 2008

खेती-बाड़ी की समीक्षा : रंजना भाटिया की कलम से

18 मई, 2008 को जब मैंने अपनी पहली पोस्‍ट लिखी थी, उस समय मैं ब्‍लॉगजगत के लिए अजनबी था। न कोई दोस्‍त, न कोई परिचित। किसी नए ब्‍लॉगर के इष्‍ट मित्रों द्वारा लिखित उसके स्‍वागत वाली पोस्‍टें पढ़ता तो सोचता- ''काश, यहां मेरा भी कोई करीबी होता।''

लेकिन इन साढ़े तीन महीनों में ब्‍लॉगजगत के लोगों से इतना स्‍नेह और प्रोत्‍साहन मिला कि एकाकीपन कब और कहां चला गया पता ही नहीं चला। आज पूरा हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत परिवार सा लगता है, और मैं अपने को सौभाग्‍यशाली समझता हूं कि मैं इस परिवार का सदस्‍य हूं।

साथी चिट्ठाकारों के प्रोत्‍साहन की ताजा कड़ी कई महत्‍वपूर्ण चिट्ठों का लेखन कर रही लोकप्रिय चिट्ठाकार रंजना भाटिया जी द्वारा मेरे चिट्ठे खेती-बाड़ी की हिन्‍दी मीडिया पर समीक्षा है। इसे इस लिंक पर जाकर देखा जा सकता है। रंजना जी ने इस देहाती किसान के ब्‍लॉग को इस लायक समझा, उनका हार्दिक आभार।

इसके साथ ही मैं तस्‍लीम के महामंत्री जाकिर अली 'रजनीश' जी को भी धन्‍यवाद देता हूं जिन्‍होंने विज्ञान ब्‍लॉग चर्चा के तहत आज अपनी पोस्‍ट में खेती-बाड़ी को भी इज्‍जत बख्‍शी है।

एक विनम्र निवेदन : कोसी नदी की प्रलयंकारी बाढ़ से बिहार के कम-से-कम 8 जिलों के 417 से भी अधिक गांवों के करीब 40 लाख लोग बेघर और दाने-दाने के मोहताज हो गए हैं। हो सकता है, इनमें से कुछ अपनी रोजी-रोटी के लिए थोड़े समय के लिए आपके-हमारे शहर-गांव में भी शरण लें। हमारी थोड़ी सी संवेदना व समझदारी इनके जीवन-संघर्ष को कुछ आसान बना सकती है।