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Sunday, November 1, 2009

अब बिना सिंचाई होगी गेहूं की खेती

देश में खेती का बहुत बडा रकबा असिंचित है या फिर यहां सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं है। ऎसे क्षेत्रों के किसानों के लिए जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जबलपुर) के वैज्ञानिकों ने गेहूं का ऎसा बीज तैयार किया है, जिसके उपयोग से बिना सिंचाई के भी 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार ली जा सकती है। कृषि विश्‍वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ.आर.एस. शुक्ला ने बताया कि करीब तीन साल की मेहनत के बाद जे डब्ल्यू 3211 किस्म के शरबती गेहूं का बीज ईजाद करने में सफलता प्राप्त की गयी है।

कम पानी में भी अधिक उत्पादन
डॉ. शुक्ला ने बताया कि यह बीज कम पानी से भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखता है। इस बीज से एक पानी से प्रति हेक्टेयर करीब 25 से 30 क्विंटल तक उत्पादन हो सकता है। इसी प्रकार यदि दो पानी की व्यवस्था हो तो प्रति हेक्टेयर करीब 35 से 40 क्विंटल तक गेहूं की पैदावार ली जा सकती है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं है उनमें किसान पहले की नमी को बचा कर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। इसकी फसल को तैयार होने में करीब 118 से 125 दिन लगते हैं। मध्‍यप्रदेश के अलावा इस बीज की मांग महाराष्ट्र व आस-पास के क्षेत्रों से अघिक हो रही है।

मौसम परिवर्तन का प्रभाव नहीं
डॉ. शुक्ला ने बताया कि मौसम में आए उतार-चढ़ाव या तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल प्रभावित हो जाती है, लेकिन अन्य की तुलना में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता अघिक होने कारण जे डब्ल्यू 3211 गेहूं की फसल पर मौसम परिवर्तन का कोई असर नहीं पड़ता है। इसके दाने चमकदार होते हैं व इसमें 10 से 12 प्रतिशत प्रोटीन की मात्रा होती है। इसके पौधे की लम्बाई 85 से 90 सेंटीमीटर तक होती है।

(आलेख : योगेश श्रीवास्‍तव, साभार : पत्रिका डॉटकाम)

8 comments:

महफूज़ अली said...

bahut achchi lagi yeh jaankari...

Udan Tashtari said...

यह तो बढ़िया खबर है.

M VERMA said...

वाह क्या बात है, खबर तो अच्छी है

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत धन्यवाद, यह खबर सुनाने के लिये.

रामराम.

अजय कुमार झा said...

खबर तो अच्छी है खासकर आज जब मौसम और बरसात की अनिश्चितता बढ गई है..देश के वैज्ञानिकों ने ऐसा किया तो मान और बढ जाता है..लेकिन अभी भी मन में एक शंका है कि क्या वाकई इस पद्धति से कोई साईड इफ़्फ़ेक्ट नहीं होगा ...जानकारी के लिये आभार आपका...

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

अरे, तब मक्का मंहगी और गेहूं सस्ता होने जा रहा है!

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जानकारी, किसानो को शायद थोडी राहत मिले, धन्यवाद

योगेन्द्र मौदगिल said...

बढ़िया जानकारी के लिये साधुवाद....

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