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Saturday, July 4, 2009

आइए, गंठीले गाजर और कुबड़ी ककड़ी को बधाई दें।

भाई, हम गंठीले गाजर, कुबड़ी ककड़ी और उन अन्‍य फलों व सब्जियों को बधाई देने जा रहे हैं, जिनका आकार कुछ बदसूरत और बेडौल-सा हो गया है। आप चाहें तो खुद भी यहां उन्‍हें ऑनलाइन बधाई दे सकते हैं। बात वस्‍तुत: यह है कि बीस साल में पहली बार हुआ है कि यूरोपीय संघ के देशों में अब बेडौल और बदसूरत फल व सब्जियां बिक्री के लिए बाजारों में लायी जा सकेंगी। अब आप ही बताइए, है न बधाई देनेवाली बात।

दरअसल इंसान ही विचित्र नहीं होते, नियम भी निराले होते हैं। और हों भी क्‍यों भी नहीं, आखिर उन्‍हें भी तो आदमी ही बनाता है। ऐसे ही नियम यूरोपीय संघ में फलों व सब्जियों के बारे में हैं, जिसके तहत बाजार में आने के लिए उनके आकार-प्रकार निर्धारित थे। गत गुरुवार यूरोपीय संघ में सब्जियों के लिए ऐतिहासिक दिन था, जब पूरे बीस साल बाद उन्‍हें इन तानाशाहीपूर्ण नियमों से आजादी मिली। अब यूरोपीय संघ के बाजारों में ककड़ी जितनी चाहे टेढ़ी हो सकती है और तरबूज़े का हरा रंग और उसकी सूरत नहीं देखी जाएगी। हालांकि सेब व टमाटर सहित 10 अन्‍य फल व सब्ज़ियों को अब भी सुंदरता के नियमों का पालन करना होगा।

यूरोपीय संघ में 10 सेंटीमीटर की ककड़ी को सिर्फ़ 10 मिलीमीटर मुड़ने की इजाज़त थी। अगर उसने इससे ज़्यादा मुड़ने की जुर्रत की तो बाज़ार से बाहर का रास्‍ता दिखा दिया जाता था। जब तक ककड़ी सीधी, सुडौल नहीं होगी, उसे बाजार में नहीं लाया जा सकता था। इसी तरह अगर गाजर में गांठ हैं तो उसे खाने लायक नहीं माना जाता था। किसानों को बड़े जतन से ऐसी ख़ास उपज तैयार करनी पड़ती थी, जो वजन, रंग, आकार आदि के निर्धारित मानकों के मेल में रहे।

लेकिन अब सब्ज़ियों और फलों की 26 किस्में अपने प्राकृतिक रूप में बाज़ार में बेची जा सकेंगी। यूरोपीय संघ के कृषि कमिश्नर मारियान फिशर बॉयल ने कहा, "1 जुलाई हमारे बाजारों में मुड़ी हुई ककड़ी और गांठ वाले गाजर की वापसी का दिन होगा।" जा‍हिर है यूरोपीय संघ के देशों में अब फलों व सब्जियों के खरीदारों के पास सस्‍ते विकल्‍प भी होंगे। वैसे भी सिर्फ बदसूरत होने के कारण मेहनत से उगाए गए स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक फलों व सब्जियों को फेंक देने में कोई समझदारी नहीं थी।

कुल 26 फलों व सब्ज़ियों को नियमों से आजादी मिली है, जिनमें खुबानी, बैंगन, गाजर, गोभी, चेरी, ककड़ी, लहसुन, पहाड़ी बादाम, फूल गोभी, हरे प्याज़, ख़रबूज़, प्याज, मटर, आलूबुख़ारा, पालक, वालनट, तरबूज़ आदि शामिल हैं। हालांकि 10 अन्‍य फलों व सब्ज़ियों को अब भी मानकों पर खरा उतरना होगा, जिनमें सेब, किवी, नींबू जाति के फल, आडू, स्ट्रॉबैरी, अंगूर, और टमाटर शामिल हैं। लेकिन किसान चाहें तो अमानक होने का उपयुक्‍त लेबल लगाकर उन्‍हें भी बेच सकते हैं।

आलेख के साथ प्रस्‍तुत फोटो यहां से लिया गया है। आप अंग्रेजी में पूरी खबर को पढ़ना और संबंधित वीडियो देखना चाहते हैं तो बीबीसी न्‍यूज के साइट पर जाना बेहतर रहेगा।

7 comments:

  1. वनस्पति जगत के 'बाउओं' की विजय है यह। शक्लो सूरत से अधिक सीरत देखनी चाहिए।

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  2. चलो जी धीरे धीरे उपेक्षित फ़ल सब्जियों को भी उनका उचित सम्मान प्राप्त होरहा है.:)

    रामराम.

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  3. आप ने बिलकुल सही कहा, लेकिन इन सब के वाजूद भी यहां फ़ल ओर सब्जियां बहुत सस्ती ओर उच्च कोटि की मिलती है

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  4. सही कह रहे हैं-स्बजियों के गुण पर जाना ही उचित है-सूरत का क्या है.

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  5. गुण सबके देखने चाहिए, क्या सब्ज़ी क्या इंसान

    ---
    तख़लीक़-ए-नज़र

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  6. उन सब्जियों को बधाई. जानकारी के लिए आभार.

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  7. असली सौन्दर्य तो सब्जी के स्वाद में है।

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अपना बहुमूल्‍य समय देने के लिए धन्‍यवाद। अपने विचारों से हमें जरूर अवगत कराएं, उनसे हमारी समझ बढ़ती है।

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