
कृषि का भारत के लिए जितना महत्व है, इससे संबंधित शिक्षा और शोध पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। लेकिन मर कर जंगलों को फायदा पहुंचानेवाले सिकाडा (Cicada) जैसे कीटों के बारे में यहां भी शोध हो तो निश्चित तौर पर यह पर्यावरण खासकर कृषि व बागवानी के लिए लाभप्रद साबित हो सकता है।
आम तौर पर कीट फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, और इसलिए उन्हें शत्रु समझा जाता है। लेकिन कुछ मित्रकीट भी होते हैं, जो जीवनकाल में या मरणोपरांत पौधों को फायदा ही पहुंचाते हैं। सिकाडा के बारे में अभी तक जो जानकारी उपलब्ध है, उसके आधार पर इसे फायदा पहुंचानेवाला कीट ही माना जा रहा है।
अमरीका के उत्तरी हिस्से में सिकाडा कीट भारी संख्या में पाए जाते हैं। ये कीट अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा पेड़ों की जड़ों में बिताते हैं जहां वह जाइलम पर निर्भर होते हैं। जब ये बड़े होते हैं तो एक साथ लाखों की संख्या में प्रजनन के लिए बाहर आते हैं। ये कीट हर 13 से 17 वर्ष में ज़मीन के नीचे से बाहर निकलते हैं और प्रजनन करते हैं। चूंकि इन कीटों की संख्या लाखों में होती है इसलिए कई कीट मरते भी हैं। 
सिकाडा प्रजनन के दौरान भारी शोर मचाते हैं। इन कीटों के प्रजनन का समय कुछ हफ्तों का ही होता है। इनकी संख्या प्रति वर्ग मीटर में 350 तक हो सकती है। कुछ जानवर इन कीटों को खाते भी हैं। लेकिन अधिकांश कीट मर कर मिट्टी में मिल जाते हैं। इन कीटों के शरीर के सड़ने से मिट्टी में बैक्टीरिया. फफूंद और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। यही कारण है कि जिन इलाक़ों में ये कीट मरते हैं, वहां के पेड़ ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं।
ये बातें अमरीकी वैज्ञानिकों के शोध में सामने आयी हैं। कुछ वर्षों पूर्व उनका ध्यान इस बात की ओर गया कि उत्तर अमरीका के जंगलों में ख़ास किस्म के ये कीड़े लाखों की संख्या में मर रहे हैं, जिससे जंगलों को काफी फायदा हो रहा है। वैज्ञानिकों के शोध में यह बात सामने आयी कि कीटों के मिट्टी में मिलने से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ने से पेड़ों को तेजी से बढ़ने में मदद मिलती है। उनके मुताबिक ये कीट वास्तव में वही नाइट्रोजन छोड़ते हैं जो ये अपने पूरे जीवन में पेड़ों की जड़ों से एकत्र करते हैं।
सिकाडा झींगुरों की तरह काफी शोर करते हैं, लेकिन ये झींगुर (Cricket) से भिन्न हैं। इसी तरह से ये फतिंगा या टिट्डी (Locust, Grasshopper) से भी भिन्न हैं। फादर कामिल बुल्के के अंगरेजी-हिन्दी शब्दकोश में सिकाडा के हिन्दी समतुल्य रइयां, चिश्चिर बताए गए हैं। किन्हीं मित्रों को भारतीय संदर्भ में सिकाडा के बारे में अतिरिक्त जानकारी हो तो वे अवश्य दें, इसके लिए हम उनके आभारी रहेंगे।
(इस आलेख की प्रेरणा इस विषय पर लावण्या जी की रोचक व ज्ञानवर्धक ब्लॉगपोस्ट से मिली, उनका हार्दिक आभार। खेती-बाड़ी में इस दोहराव का उद्देश्य भारतीय संदर्भ में सिकाडा के बारे में जानकारी एकत्र करना और उसका प्रसार है। आलेख के चित्र व संदर्भ बीबीसी हिन्दी और विकिपीडिया से लिए गए हैं।)
Agriculture fastest-growing research in China
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Agricultural research is booming in China. (Photo credit: Flickr/Harry
Taiwan / Harry Huang Photography)
Agricultural science is China's fastest-growing re...









29 comments:
बहुत उपयोगी जानकारी दी है. आभार.
सिकाडा के बारे में मा. लावण्या जी के ब्लॉग पर पढा था ! और आज आपने भी बड़ी विस्तृत जानकारी दी ! आपका बहुत आभार और आज दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं !
हम इन्हे झींगुर कहतें हैं ...काफी रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी..बीर बहूटी ( इन्द्र वधु )के बारे में भी लिखिए वह मुझे बहुत पसंद है
नहीं लवली जी, ये झींगुर नहीं हैं। झींगुर से सिकाडा भिन्न हैं। इस मामले में मैं निश्चित हो चुका हूं।
अच्छी जानकारी दे रहे हैं आप, अशोक जी।
अशोक जी आप ने तो हमारी जानकारी बदा दी है, बांलाग पर आने से हमे कई नई बातो का पता चल गया,बहुत बहुत धन्यवाद,
आप सभी को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं
हो सकता है.. मैंने कभी झींगुर को करीब से नही देखा..पर आवाज तो काफी सुनी है ..शायद कुछ और हो,मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नही..
सिकडा के बारे में जानकारी के लिये धन्यवाद। लावण्या जी की पोस्ट से परिचय मिला था। अगर भारतीय वातावरण में पनप सकें तो इन्हें नाइट्रोजन के लिये पालना भी उपयोगी होगा - भले ही खर्चा भी हो?! शायद फर्टिजाइजर से सस्ता पड़े - खाद की पर्यावरणीय प्रभाव की कीमत जोड़ते हुये।
बहुत उम्दा जानकारी दी आपने ! सिकाडा ... मतलब आवाज झींगुर जैसी .. पर ये झींगुर नही है ....? ठीक सर !
बेहतरीन और उम्दा जानकारी ! आपके ब्लॉग पर हमेशा ही इन विषयों की भरपूर जानकारी मिलती है ! दशहरे की शुभकामनाएं आपको और आपके परिवार को !
लाभकारी जानकारी के लिए धन्यवाद.
आप को विजयादशमी की शुभकामनाएं.
अशोक जी आप साधुवाद के पात्र हैं -लावण्या जी के बाद आपने इस पर पूरा शोध ही कर डाला -मैंने भी किया है मगर अभी भी मेरी कुछ शंकाएँ हैं जैसे क्या यही तो रेंवां नही है पर फोटो तो अलग तरह का है .एक किताब के अनुसार भारत में यह पहाडों पर पाया जाता है -टंडी जगह पर !
आपको विजया दशमी की बधाई एवँ शुभकामना, परिवार सह:
सिकाडा पर ये जानकारी यहाँ देकर अच्छा किया आपने..आपका डाक पता मुझे अवश्य लिख भेजियेगा अशोक भाई साहब
मेरे ई मेल पर - lavnis@gmail.com
or lavanyashah@yahoo.com
- लावण्या
अशोक जी...बेहद रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी दी है आप ने...हम खेती करते नहीं लेकिन निर्भर तो उसी पर हैं इसीलिए यहाँ ज्ञान प्राप्त करने चले आते हैं...बहुत बहुत धन्यवाद आपका हम जैसे अज्ञानियों में ज्ञान बांटने के लिए...
नीरज
यह जानकारी बहुत उपयोगी है ..बहुत कम जानते हैं इस बारे में हम सब ,ब्लॉग की दुनिया का यही फायदा है की हम वह सब भी जान रहे हैं जिस से अनजान है ..इस तरह के लेख निरंतर देते रहे ...शुक्रिया
अशोक जी
कीटनाशकों का अंधा प्रयोग मित्र कीटों को समाप्त कर रहा है
कीटनाशकों के दनादन प्रयोग से किसान कुछ परहेज करेंगें तो शायद मित्रकीट बचे रहेंगें
इस जरूरी आलेख के लिये आपको बधाई
अशोक जी, जानकारी के लिए धन्यवाद. मुझे भी सिकाडा के बारे में अमेरिका आने के बाद ही पता चला था.
यदि आज का मनुष्य सिकाडा से ही कुछ प्रेरणा ले सके, तो यह धरती धन्य हो जाए।
ज्ञानवर्द्धन के लिए आभार।
अच्छी जानकारी दे रहे हैं आप, अशोक जी।
अपना काम जरी रखिये
अगर किसी कृषि विश्वविद्यालय में इस पर काम हो सका तो बड़ा अच्छा होता.
फादर कामिल बुल्के सेंत जेवियर्स कॉलेज रांची से जुड़े रहे और उनका नाम देखकर यूँहीं अच्छा लगा !
आपका कार्य सराहनीय है ! आपको प्रणाम
मरकर भी ये मिट्टी को कितना कुछ दे जाते हैं। ज्ञानदत्त जी की बात से मैं सहमत हूं, अगर हो सके तो ऐसे कीटों को पालना चाहिए और ऐसी चीजों के बारे में ज्यादा जागरुकता भी लानी चाहिए।
पहली बार आपके ब्लाग मे आना हुआ आप बहुत ही उपयोगी जानकारी दे रहे है/बहुत अच्छा लगा आपका ब्लाग/आपको और आपके परिवार के साथ ही साथ गांव में सभी लोगों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें/
आप सब सुखी, स्वस्थ और सानंद हों. दीवाली की शुभकामनाएं.
दीवाली शुभ हो
magar
किसी जरूरी कीड़े की तलाश में हो क्या..?
२० दिन से ज्यादा हो गये...
आऒ... बंधु ..पोस्ट लेकर..
मुझे ब्लागेरिया हो गया आपको ब्लाग से गायब देख कर...
परिवार व इष्ट मित्रो सहित आपको दीपावली की बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं !
पिछले समय जाने अनजाने आपको कोई कष्ट पहुंचाया हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ !
आपकी सुख समृद्धि और उन्नति में निरंतर वृद्धि होती रहे !
दीप पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
आपको सपरिवार दीपोत्सव की शुभ कामनाएं। सब जने सुखी, स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें। यही प्रभू से प्रार्थना है।
बहुत उपयोगी जानकारी आभार.
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अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद। अपने विचारों से हमें जरूर अवगत कराएं, उनसे हमारी समझ बढ़ती है।