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Thursday, July 17, 2008

जट्रोफा की खेती में बढ़ा ऑटो कंपनियों का रुझान


अनाज की खेती कर लगातार घाटा उठा रहे किसानों का जट्रोफा की ओर रुझान तो हो ही रहा था, अब ऑटो कंपिनयों के भी इसमें दिलचस्‍पी लेने की खबर है। पेश है इकनॉमिक टाइम्‍स में अहमदाबाद डेटलाइन से प्रकाशित एक समाचार :

तेल में लगी आग से परेशान ऑटो कंपनियां भविष्य के ईंधन को लेकर तैयारी में जुट गई हैं। बॉयोडीजल को भविष्य के ईंधन के रूप देख जा रहा है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के चलते कंपनियां अब बॉयोडीजल उत्पादन के लिए जट्रोफा पर अपने दांव लगा रही हैं। जट्रोफा पर दांव लगाने वाली प्रमुख ऑटो कंपनियों में जनरल मोटर्स, डेमलर-क्राइसलर और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल हैं। जीएम और डेमलर-क्राइसलर ने अपने वाहनों पर जट्रोफा से तैयार ईंधन का परीक्षण तो किया ही है, अब जट्रोफा की व्यापक पैमाने पर खेती को भी बढ़ावा दे रही हैं।

गुजरात स्थित सेन्ट्रल सॉल्ट एंड मरिन केमिकल्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएसएमसीआरआई) विभिन्न कंपनियों की गाड़ियों के भविष्य के इंजनों के लिए जट्रोफा से तैयार बायोडीजल का परीक्षण कर रही है। यूरोप की ऑटोमोबाइल कंपनी डेमलर-क्राइसलर द्वारा गुजरात और उड़ीसा में पिछले 4 सालों से जट्रोफा की खेती की जा रही है। प्रमुख अमेरिकी ऑटो कंपनी जनरल मोटर्स भी इस दौड़ में शामिल हो गई है और वह गुजरात की 75-80 हेक्टेयर बंजर भूमि पर जट्रोफा की खेती करने जा रही है।

जनरल मोटर्स (इंडिया) के प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर कार्ल स्लिम ने ईटी को बताया कि जनरल मोटर्स अपने में जट्रोफा के परीक्षण के लिए पहले चरण में 5 लाख डॉलर का निवेश कर चुकी है। स्लिम ने कहा कि तेल के दाम में वृद्धि का दौर खत्म होता नहीं दिख रहा, जिसे देखते हुए जनरल मोटर्स ईंधन के विकल्प पर आक्रामक तरीके से काम कर रही है। बायोडीजल के रूप में जट्रोफा की उपयोगिता को देखते कंपनी की छह गाड़ियों पर भावनगर स्थित सीएसएमसीआरआई ने जट्रोफा से संबंधित परीक्षण किया है। तेल की समस्या को देखते हुए कंपनी अन्य विकल्पों पर भी नजर रखे हुए है, इसी के तहत इलेक्ट्रिक वाहन, एलपीजी और सीएनजी मॉडलों को भी देखा जा रहा है। स्लिम ने यह भी बताया कि जट्रोफा की ठेके पर खेती के लिए कंपनी शीघ्र ही सीएसएमसीआरआई के साथ एक समझौता करेगी।

उन्होंने कहा कि जट्रोफा को लेकर कंपनी प्रतिबद्ध है। गुजरात के 75-80 हेक्टेयर बंजर भूमि पर जट्रोफा की खेती की तैयारी हो चुकी है। कंपनी के कॉरपोरेट मामलों के वाइस प्रेजिडेंट पी. बालेंद्रन ने बताया कि योजना की मंजूरी के बाद जरूरत के अनुरूप निवेश किया जाएगा, फिलहाल योजना गुजरात सरकार के पास भेजी जा चुकी है।

सीएसएमसीआरआई के डायरेक्टर पुष्पितो के घोष ने ईटी को बताया कि जनरल मोटर्स के साथ हम 5 वर्षीय प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। योजना के तहत 75 हेक्टेयर क्षेत्र में जट्रोफा के पौधों को उगाकर अच्छी गुणवत्ता के बीज प्राप्त किए जाएंगे। इंस्टीट्यूट का लक्ष्य इस नई परियोजना के तहत जट्रोफा के बीज का साल में करीब 100 टन उत्पादन करना है। संस्था के सीनियर वैज्ञानिक ने जट्रोफा के अच्छे उत्पादन का भरोसा जताते हुए कहा कि बढ़िया तकनीक और प्रयास से हम इसे प्राप्त कर लेंगे। सीएसएमसीआरआई बीज से 40 फीसदी तक तेल निकालने में सक्षम है।

डेमलर-क्राइसलर 90,000 लीटर बायोडीजल हासिल करने के लिए पिछले 4 साल में 3 करोड़ रुपए लगा चुकी है। इस योजना के तहत कंपनी गुजरात और उड़ीसा में जट्रोफा के प्रत्येक पौधे से 1 से लेकर 5 किलोग्राम तक बीज प्राप्त कर रही है। साल 2006 में मर्सडीज कार पर जट्रोफा का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था और अब डेमलर-क्राइसलर लक्जरी कारों में उत्सर्जन और क्षमता संबंधी परीक्षण के लिए 500 लीटर जट्रोफा बॉयोडीजल का उपयोग करेगी।

इस क्रम में अगली कड़ी एशिया की प्रमुख कंपनी टोयोटा हो सकती है। सीएसएमसीआरआई ने टोयोटा क्वालिस (इंजन में बिना किसी परिवर्तन के) पर शुद्ध जट्रोफा बायोडीजल का प्रयोग 86,000 किलोमीटर चलाकर किया है।

5 comments:

  1. बहुत अच्छी खबर है. बायो डीजल ही विकल्प है.

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  2. जट्रोफा पर मैने भी लिखा था। पर प्रतिक्रियायें बहुत विपरीत थीं। पंकज अवधिया जी तो उसके खिलाफ एक अभियान ही चला रहे हैं।
    पेट्रोलियम की कीमते बढ़ने से शायद सोच बदले।

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  3. मैंने भी अपने गाँव में सलाह दी थी... पर लोगों ने कहा की फायदेमंद नहीं होगी... मुझे ज्यादा पता भी नहीं था इसके बारे में तो कुछ ज्यादा बता भी नहीं पाया.... बस लोगों ने यही कहा की जिन्होंने कोशिश की उन्हें घाटा लगा...

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  4. आम जनता को वैकल्पिक रास्तो पर चलने मे वक्त, या ऐसे कहे कि वो सिर्फ़ मजबूरी मे ही अपने कदम आगे बढाते हैं, ऐसा भी नही होगा तो जब कम्पनीयाँ तैयार हो जायेंगी तो लोग वहा नौकरी करने जायेंगे।

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  5. आप लोगों को इन्टरनेट पर खेती बाडी व किसानो की समस्याओं पर आवाज उठाते देख बहुत अच्छा लगा,में आईटी का विद्यार्थी हूँ और एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हूँ जिससे किसानो को इन्टरनेट के जरिये उनकी खेती में सहयोग सलाह व
    मदद दी जा सके,

    आप से अनुरोध है की आप इस प्रोजेक्ट के गूगल ग्रुप से जुड़ कर अपना सहयोग दें |

    http://groups.google.co.in/group/fdaindia

    धन्यवाद
    -खेतेश्वर बोरावत

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